शोध नैतिकता के सिद्धांत
शोध सहायता वास्तविक प्रमाण पर आधारित होनी चाहिए। अध्ययन, प्रतिभागी, डेटा, विश्लेषण, संदर्भ या नैतिक स्वीकृति गढ़कर उन्हें वास्तविक बताना स्वीकार्य नहीं है।
प्रमाण का पता लगाया जा सके
डेटा और निष्कर्ष के स्रोत जाँच योग्य होने चाहिए। प्रतिभागियों के काल्पनिक उत्तर, झूठी References या मनचाहे परिणाम बनाने के बजाय उपलब्ध प्रमाण की सीमा स्पष्ट की जाती है।
पद्धति में पारदर्शिता
रिपोर्ट में वही खोज, चयन और विश्लेषण लिखें जो वास्तव में किए गए हैं। PRISMA जैसी reporting guideline छूटे हुए काम को पूरा हुआ बताने का आधार नहीं है।
निर्णय और जिम्मेदारी
शोध प्रश्न, तथ्य, संस्थागत अनुमति, निष्कर्ष और अंतिम प्रस्तुति की जिम्मेदारी शोधकर्ता की रहती है। परामर्श विश्वविद्यालय, Ethics Committee या Journal के निर्णय की जगह नहीं लेता।
सीमाएँ और हितों का टकराव
अधूरे प्रमाण, अनिश्चितता और वैकल्पिक व्याख्याएँ स्पष्ट रखें। हितों के टकराव को लागू नियमों के अनुसार बताएँ और सत्यापित तथ्य को अनुमान से अलग लिखें।
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